९. भारत

जग में सुंदर, विशाल, अनुपम एक अजूबा
भारत जैसा देश नहीं है, इस दुनिया में दूजा

सुबह सुनहली किरणें आकर,
खिड़की खोल जगातीं
मुंडेर पर कोयल-चुनमुन,
राग प्रभाती गातीं

कामकाज में जुटा हुआ है, देखो देश समूचा
भारत जैसा देश नहीं है, इस दुनिया में दूजा ।।

 सच्चे मन से गले लगाकर,
हम हैं प्रेम जताते
लेकिन जो भी आँख दिखाता,
उसको सबक सिखाते

 प्रगति पथ पर बढ़ते करते श्रम की पूजा
भारत जैसा देश नहीं है, इस दुनिया में दूजा ।।

 डॉ. मधुसूदन साहा